एप्पल गूगल माइक्रोसॉफ्ट से बेहतर Whispr Flow

एप्पल गूगल माइक्रोसॉफ्ट से बेहतर Whispr Flow

​The Jagran News: 'आयरन मैन' फिल्म से मिला आइडिया, स्टैनफर्ड में किया साकार - भारतवंशी छात्रों का 'whispr Flow' बना 19 हजार करोड़ का यूनिकॉर्न

​सिलिकॉन वैली में भारतवंशी छात्रों, तनय कोठारी और सहज गर्ग के एआई (AI) और वॉयस डिटेक्शन स्टार्टअप  (Wispr) ने तहलका मचा दिया है। फंडिंग के दूसरे राउंड में कंपनी को 2,679 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश मिला है। इसके साथ ही स्टार्टअप की कुल वैल्यूएशन 19,136 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है और इसने टेक जगत के नए 'यूनिकॉर्न क्लब' में एंट्री मार ली है। इस फंडिंग राउंड की अगुवाई प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म मेन्लो वेंचर्स ने की है।

​'जार्विस' से मिली प्रेरणा, 2024 में मिली असली कामयाबी

इस स्टार्टअप की कहानी 2008 से शुरू होती है, जब तनय ने 'आयरन मैन' फिल्म में टोनी स्टार्क के कंप्यूटर असिस्टेंट 'जार्विस' (JARVIS) को देखा था। सालों बाद स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में पहले ही दिन उनकी मुलाकात सहज से हुई।

​2021 में दोनों ने स्मार्ट वियरेबल्स में 'साइलेंट स्पीच' टेक्नोलॉजी पर काम शुरू किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

​2024 में उन्होंने 'व्हिसपर फ्लो' (Wispr Flow) मैक ऐप लॉन्च किया। यह ऐप इंसानी आवाज को बेहद तेजी और सटीकता के साथ टेक्स्ट में बदलता है।

​दिग्गज टेक कंपनियों को दे रहा है सीधी टक्कर

निवेशकों का मानना है कि एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के वॉइस टूल्स के मुकाबले 'व्हिसपर' ऐप की सटीकता कहीं ज्यादा बेहतर है।

​समाज के खास वर्ग के लिए बना वरदान

यह ऐप सिर्फ एक डिक्टेशन टूल नहीं है, बल्कि दृष्टिहीन लोगों, डिस्लेक्सिया (Dyslexia), एडीएचडी (ADHD) और मोटर डिसेबिलिटी से जूझ रहे लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हो रहा है। इसकी विश्वसनीयता इतनी है कि लोग बिना रुके बड़े दस्तावेज़ और किताबें तक आसानी से लिख रहे हैं।

​तनय और सहज का स्पष्ट कहना है कि इस टेक्नोलॉजी का उद्देश्य इंसानों की जगह लेना नहीं है, बल्कि लोगों को कीबोर्ड टाइपिंग से आज़ादी दिलाकर उनके विचारों और फैसलों को तेज़, सरल और ज्यादा प्रभावी बनाना है।